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ई-इनवॉइस › ई-इनवॉइस किसे चाहिए

GST में ई-इनवॉइस किसे चाहिए?

ई-इनवॉइस का मतलब सरकारी वेबसाइट पर बिल बनाना नहीं है। इनवॉइस आप अपने ही सॉफ़्टवेयर में बनाते हैं; फिर उसे Invoice Registration Portal (IRP) पर रिपोर्ट करते हैं, जो उसे रेफ़रेंस नंबर (IRN) और साइन किया QR कोड देता है। इसके बिना, जिस बिज़नेस को ई-इनवॉइस करना ज़रूरी है उसका B2B इनवॉइस वैध इनवॉइस नहीं माना जाता, और खरीदार उस पर इनपुट टैक्स क्रेडिट नहीं ले सकता।

टर्नओवर सीमा: ₹5 करोड़

1 अगस्त 2023 से (Notification 10/2023-Central Tax) किसी बिज़नेस को ई-इनवॉइस करना होता है अगर उसका कुल टर्नओवर 2017-18 के बाद किसी भी वित्त वर्ष में ₹5 करोड़ से ऊपर गया हो। कुल टर्नओवर पूरे PAN पर गिना जाता है, सभी राज्यों और GSTIN को मिलाकर, किसी एक ब्रांच पर नहीं।

कौन से डॉक्यूमेंट

टर्नओवर चाहे जो हो, किसे छूट है

30 दिन की सीमा

1 अप्रैल 2025 से, ₹10 करोड़ या उससे ज़्यादा कुल टर्नओवर वाले बिज़नेस को हर इनवॉइस, क्रेडिट नोट या डेबिट नोट उसकी तारीख से 30 दिन के अंदर रिपोर्ट करना होता है। 1 अप्रैल की तारीख वाला इनवॉइस 30 अप्रैल तक रिपोर्ट हो सकता है; 31वें दिन IRP उसे मना कर देता है। ₹10 करोड़ से कम पर अभी ऐसी रोक नहीं है। ई-इनवॉइस वाले हिस्से में आपका टर्नओवर चुनें, मेकर फ़ाइल बनाने से पहले यह जाँच खुद कर लेगा।

पोर्टल में साइन इन करना

1 अप्रैल 2025 से ई-इनवॉइस और ई-वे बिल पोर्टल हर करदाता से साइन इन करते समय रजिस्टर्ड मोबाइल पर एक बार का कोड (OTP), या कोई दूसरा सेकंड स्टेप माँगते हैं। अपलोड करते समय वह फ़ोन पास रखें।

सीमाएँ और छूट नोटिफ़िकेशन से बदलती रहती हैं। यह पेज 5 नवंबर 2026 को जाँचा गया था; मौजूदा स्थिति einvoice1.gst.gov.in, CBIC की वेबसाइट या अपने अकाउंटेंट से पक्की कर लें।
अपनी ई-इनवॉइस फ़ाइल अभी बनाएँ। एक इनवॉइस या पूरी शीट।मेकर खोलें
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