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GST में ई-इनवॉइस किसे चाहिए?
ई-इनवॉइस का मतलब सरकारी वेबसाइट पर बिल बनाना नहीं है। इनवॉइस आप अपने ही सॉफ़्टवेयर में बनाते हैं; फिर उसे Invoice Registration Portal (IRP) पर रिपोर्ट करते हैं, जो उसे रेफ़रेंस नंबर (IRN) और साइन किया QR कोड देता है। इसके बिना, जिस बिज़नेस को ई-इनवॉइस करना ज़रूरी है उसका B2B इनवॉइस वैध इनवॉइस नहीं माना जाता, और खरीदार उस पर इनपुट टैक्स क्रेडिट नहीं ले सकता।
टर्नओवर सीमा: ₹5 करोड़
1 अगस्त 2023 से (Notification 10/2023-Central Tax) किसी बिज़नेस को ई-इनवॉइस करना होता है अगर उसका कुल टर्नओवर 2017-18 के बाद किसी भी वित्त वर्ष में ₹5 करोड़ से ऊपर गया हो। कुल टर्नओवर पूरे PAN पर गिना जाता है, सभी राज्यों और GSTIN को मिलाकर, किसी एक ब्रांच पर नहीं।
- एक बार सीमा पार हो जाए तो नियम बना रहता है, भले ही बाद में टर्नओवर ₹5 करोड़ से नीचे आ जाए।
- यह उस साल के अगले वित्त वर्ष से शुरू होता है जिसमें आपने सीमा पार की। 2025-26 में पार की? तो ई-इनवॉइस 1 अप्रैल 2026 से लागू है।
- पक्का नहीं है? हर साल के GSTR-3B के कुल आँकड़े देखें, या अपने अकाउंटेंट से पूछें। ई-इनवॉइस पोर्टल (einvoice1.gst.gov.in) पर किसी GSTIN का ई-इनवॉइस स्टेटस भी खोजा जा सकता है।
कौन से डॉक्यूमेंट
- टैक्स इनवॉइस, क्रेडिट नोट और डेबिट नोट,
- रजिस्टर्ड बिज़नेस (B2B) को, SEZ यूनिट और डेवलपर को, एक्सपोर्ट और डीम्ड एक्सपोर्ट की सप्लाई के लिए।
- ग्राहकों (B2C) के बिल, बिल ऑफ़ सप्लाई, डिलीवरी चालान या रसीदों के लिए नहीं।
- 1 जनवरी 2027 से, बिना रजिस्ट्रेशन वाले सप्लायर से रिवर्स चार्ज में खरीद के और सर्विस के इंपोर्ट के सेल्फ़-इनवॉइस भी रिपोर्ट करने होंगे (Notification 04/2026-Central Tax)। यह साइट बिक्री के इनवॉइस बनाती है; सेल्फ़ इनवॉइस मेकर self-invoice.niveshsahayak.in पर है।
टर्नओवर चाहे जो हो, किसे छूट है
- बैंक, बीमा कंपनियाँ, NBFC और दूसरे वित्तीय संस्थान,
- गुड्स ट्रांसपोर्ट एजेंसी (GTA) और यात्री ट्रांसपोर्ट सर्विस,
- मल्टीप्लेक्स स्क्रीन में सिनेमा की एंट्री,
- SEZ यूनिट (SEZ डेवलपर को छूट नहीं है),
- सरकारी विभाग और स्थानीय निकाय।
30 दिन की सीमा
1 अप्रैल 2025 से, ₹10 करोड़ या उससे ज़्यादा कुल टर्नओवर वाले बिज़नेस को हर इनवॉइस, क्रेडिट नोट या डेबिट नोट उसकी तारीख से 30 दिन के अंदर रिपोर्ट करना होता है। 1 अप्रैल की तारीख वाला इनवॉइस 30 अप्रैल तक रिपोर्ट हो सकता है; 31वें दिन IRP उसे मना कर देता है। ₹10 करोड़ से कम पर अभी ऐसी रोक नहीं है। ई-इनवॉइस वाले हिस्से में आपका टर्नओवर चुनें, मेकर फ़ाइल बनाने से पहले यह जाँच खुद कर लेगा।
पोर्टल में साइन इन करना
1 अप्रैल 2025 से ई-इनवॉइस और ई-वे बिल पोर्टल हर करदाता से साइन इन करते समय रजिस्टर्ड मोबाइल पर एक बार का कोड (OTP), या कोई दूसरा सेकंड स्टेप माँगते हैं। अपलोड करते समय वह फ़ोन पास रखें।